देवरिया के जिला कारागार में मचा हड़कंप, विचाराधीन बंदी हकीक अंसारी मौत
देवरिया के जिला कारागार में मचा हड़कंप, विचाराधीन बंदी हकीक अंसारी मौत
देवरिया। जिला कारागार में बंद 80 साल के बंदी हकीक अंसारी का गुरुवार दोपहर करीब 2 बजे मौत हो गई। बताया जा रहा है कि तबीयत बिगड़ने पर हकीक को देवरिया मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। जहां उसे चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया गया। परिजनों ने जेल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही और हत्या का आरोप लगाया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मिली जानकारी के अनुसार
हकीक अंसारी कुशीनगर के चौरा खास थाना क्षेत्र के भटवा गांव के निवासी थे। वह अपने भाई रफीक अंसारी के साथ धोखाधड़ी, कूटरचना और जमीन से जुड़े मामले में 26 जुलाई 2023 से देवरिया जिला कारागार में विचाराधीन बंदी के रूप में निरुद्ध था।
पुलिस के अनुसार, दोनों भाइयों पर आरोप था कि उन्होंने वर्षों पहले बेची गई जमीन को कथित रूप से दोबारा दूसरे व्यक्ति के नाम बेच दिया। शिकायतकर्ता ने फर्जी दस्तावेज तैयार करने और सरकारी अभिलेखों में कूट रचना करने का भी आरोप लगाया था। इसी मामले में गिरफ्तारी के बाद न्यायालय के आदेश पर जेल भेजा गया था।
मृतक विचाराधीन बंदी के बेटे मेराज ने आरोप लगाया कि उनके पिता लंबे समय से उच्च रक्तचाप और मधुमेह के मरीज थे तथा नियमित दवाओं पर निर्भर थे। परिवार कई बार दवाएं लेकर जिला कारागार पहुंचा, लेकिन जेल प्रशासन ने यह कहते हुए दवाएं अंदर नहीं जाने दीं कि उनका इलाज जेल अस्पताल में कराया जाएगा।
परिजनों का कहना है कि यदि समय पर आवश्यक दवाएं और उचित इलाज मिलता तो उनकी जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
जेलर राजकुमार वर्मा ने बताया कि जिला कारागार में बंद एक विचाराधीन बंदी की मौत हुई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य तथ्यों के आधार पर पूरे मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वही इस मामले में अब सभी की निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर है। पुलिस का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद मौत के वास्तविक कारण स्पष्ट होंगे। यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या अन्य तथ्य सामने आते हैं तो उसी आधार पर कार्रवाई की जाएगी। वहीं, घटना के बाद जिला कारागार में बंद विचाराधीन बंदियों के स्वास्थ्य प्रबंधन और चिकित्सा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।
