एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत 60 कृषकों को मिला प्रशिक्षण
देवरिया। एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना 2025-26 के अंतर्गत चयनित 60 कृषकों का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुक्रवार को कार्यालय जिला उद्यान अधिकारी, देवरिया परिसर में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी ने की।
कार्यक्रम के शुभारंभ पर जिला उद्यान अधिकारी श्री रामसिंह ने प्रशिक्षण में उपस्थित कृषकों एवं उप निदेशक कृषि, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी मत्स्य, एनएचआरडीएफ प्रभारी, भू-संरक्षण अधिकारी, कृषि ज्ञान केंद्र प्रभारी तथा कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों का स्वागत करते हुए एकीकृत बागवानी विकास मिशन सहित उद्यान विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कृषक प्रशिक्षण के उद्देश्य एवं महत्व पर प्रकाश डाला।
उद्यान निरीक्षक श्री पत्रिका सिंह, सहायक उद्यान निरीक्षक श्री सुशील शर्मा एवं श्री रणजीत यादव द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 में निदेशालय से प्राप्त विभिन्न योजनाओं के लक्ष्यों की विस्तृत जानकारी दी गई। पत्रिका सिंह ने जायद मौसम की सब्जीवर्गीय फसलों के विषय में जानकारी देते हुए इच्छुक कृषकों से अधिक से अधिक संख्या में कृषक पंजीकरण पोर्टल पर पंजीकरण कराने का आग्रह किया।
प्रगतिशील कृषक श्री शिवम कुशवाहा पुत्र श्री अनिरुद्ध कुशवाहा, निवासी ग्राम शिवधरिया, विकास खंड भलुअनी, जनपद देवरिया ने बैंगन, टमाटर (ब्रोमैटो) एवं फूलगोभी की खेती से होने वाले लाभों के बारे में कृषकों को जानकारी दी। एनएचआरडीएफ प्रभारी श्री विनोद सिंह ने प्याज, लहसुन, आलू एवं किचन गार्डन की खेती के संबंध में जानकारी देते हुए कृषकों को इन फसलों को अपनाने हेतु प्रेरित किया।
भू-संरक्षण अधिकारी संतोष कुमार मौर्य ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत जल संरक्षण, उत्पादन वृद्धि एवं ड्रिप तथा मिनी/पोर्टेबल स्प्रिंकलर तकनीक के उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने कृषकों को अधिक से अधिक वृक्षारोपण, भूमि व जल के समुचित उपयोग तथा योजना अंतर्गत 90 एवं 80 प्रतिशत अनुदान का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक श्री जय कुमार ने मौनपालन, एकीकृत खेती एवं परंपरागत औद्यानिक फसलों में नवीनतम तकनीकों के प्रयोग पर विस्तार से जानकारी दी। मौनपालन प्रशिक्षण के इच्छुक कृषकों को फरवरी माह में आयोजित होने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रम की जानकारी दी गई तथा कृषकों के प्रश्नों का समाधान किया गया।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी मत्स्य विजय मिश्र ने कृषकों को कृषि, बागवानी एवं पशुपालन के साथ मत्स्य पालन को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने बहुप्रकारी खेती की आवश्यकता पर बल देते हुए विभिन्न विभागीय योजनाओं से लाभ लेकर खेती में होने वाले जोखिम को कम करने की बात कही। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी एस.एन. प्रसाद ने औद्यानिक खेती के साथ पशुपालन की उपयोगिता, पशु रोगों की जानकारी एवं उनके उपचार पर प्रकाश डाला। उन्होंने सेक्स सॉर्टेड सीमेन के उपयोग से संबंधित जानकारी देते हुए अधिकाधिक लाभ उठाने की अपील की।
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मंधाता सिंह ने जलवायु परिवर्तन एवं मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए एकीकृत खेती अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने खेती के साथ पशुपालन, बागवानी, मत्स्य पालन, मशरूम उत्पादन एवं पॉलीहाउस तकनीक की विस्तृत जानकारी दी।
उप निदेशक कृषि सुभाष मौर्य ने मिश्रित एवं एकीकृत खेती जैसे गन्ने के साथ आलू, सरसों, गोभी तथा केले के साथ बैंगन व टमाटर की खेती से होने वाले लाभ एवं लागत विश्लेषण पर जानकारी देकर कृषकों को प्रोत्साहित किया। कृषि ज्ञान केंद्र प्रभारी संतोष चतुर्वेदी ने पोमैटो (आलू-टमाटर) एवं ब्रोमैटो (बैंगन-टमाटर) की एक ही पौधे पर खेती के लाभ, अधिक उत्पादन एवं कम रोग-कीट संक्रमण के विषय में जानकारी दी।
मुख्य विकास अधिकारी ने कृषकों को खेती के साथ व्यवसायिक दृष्टिकोण अपनाने एवं गुणवत्तापूर्ण जैविक उत्पादन पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि जनपद के हल्दी उत्पादक कृषकों को ‘‘देव हेल्दी ब्रांड’’ के माध्यम से एफपीओ द्वारा प्रोत्साहित किया जा रहा है तथा हल्दी उत्पादकों से एफपीओ से जुड़कर विपणन व्यवस्था सुदृढ़ करने की अपील की।
उन्होंने जनपद की सभी न्याय पंचायतों में स्वच्छता अभियान, श्रमदान, चारागाहों में वृक्षारोपण एवं नेपियर घास जैसी चारा फसलों के रोपण हेतु कृषकों को प्रेरित किया। साथ ही नवयुवकों को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना एवं उद्योग विभाग की योजनाओं से लाभान्वित कराने का आश्वासन दिया। अंत में जिला उद्यान अधिकारी द्वारा समस्त अतिथियों, अधिकारियों एवं कृषकों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का समापन किया गया।
