तेज हवा और रिमझिम बारिश ने किसानों की मेहनत पर फेरा पानी, खेतों में बिछी धान की पकी फसल

तेज हवा और रिमझिम बारिश ने किसानों की मेहनत पर फेरा पानी, खेतों में बिछी धान की पकी फसल

तेज हवा और रिमझिम बारिश ने किसानों की मेहनत पर फेरा पानी, खेतों में बिछी धान की पकी फसल

एक सप्ताह बाद होनी थी कटाई, खेतों में पानी भरने से धान की फसल सड़ने का खतरा; आलू, सरसों और मटर की बुवाई भी होगी प्रभावित

 वाराणसी। जनपद के चौबेपुर क्षेत्र में तेज हवा के झोंकों के साथ हुई रिमझिम बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेतों में पककर तैयार खड़ी धान की फसल हवा के दबाव से पानी में ही गिरकर बिछ गई है। पहले से खेतों में पानी भरा होने के कारण गिरी हुई फसल के सड़ने का खतरा भी बढ़ गया है। इससे किसानों की महीनों की मेहनत और खेती में लगी पूंजी पर पानी फिरता नजर आ रहा है।

गरथौली निवासी किसान दुर्गेश चौबे ने बताया कि उनकी खेती कौआपुर, परानापुर और गरथौली गांव में है। गरथौली और कौआपुर में उन्होंने खेत बटाई पर दे रखे हैं, जबकि परानापुर में स्वयं मजदूर लगाकर धान की रोपाई कराई थी। इस बार धान की फसल अच्छी स्थिति में थी और लगभग एक सप्ताह बाद कटाई शुरू होने वाली थी। लेकिन अचानक तेज हवा और बारिश के कारण खेतों में खड़ी फसल पानी में गिर गई।

दुर्गेश चौबे ने बताया कि 20 बिस्वा खेत में जुताई, धान की नर्सरी तैयार करने, रोपाई की मजदूरी, खाद और सिंचाई सहित अब तक दस हजार रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं। फसल तैयार होने के समय इस तरह गिर जाने से लागत निकलना भी मुश्किल नजर आ रहा है। खेतों में पानी भरा होने के कारण गिरी हुई धान की बालियों के सड़ने और दाने खराब होने की आशंका बनी हुई है।

उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष भी इसी तरह बेमौसम बारिश और तेज हवा से फसल को नुकसान पहुंचा था। लगातार हो रहे नुकसान के चलते अब खेती घाटे का सौदा बनती जा रही है। बटाई पर खेती करने के लिए भी अब लोग तैयार नहीं हो रहे हैं। किसानों के सामने लागत निकालने के साथ अगली फसल की तैयारी का संकट भी खड़ा हो गया है।

किसानों का कहना है कि धान की फसल खेतों में गिरने से कटाई में देरी होगी। गिरी हुई फसल काटने में अधिक मजदूरी और समय लगेगा। इसका सीधा असर रबी की फसलों की तैयारी पर पड़ेगा। धान की कटाई देर से होने के कारण आलू, सरसों और मटर की बुवाई भी पिछड़ जाएगी। इससे आगामी फसलों की पैदावार प्रभावित होने की आशंका है।

किसानों ने प्रशासन और कृषि विभाग से प्रभावित फसलों का स्थलीय निरीक्षण कराकर नुकसान का आकलन कराने तथा उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है। उनका कहना है कि मौसम की मार से पहले ही परेशान किसानों को आर्थिक सहायता मिले, ताकि वे अगली फसल की बुवाई कर सकें।