मतगणना में धांधली के आरोपों पर शिक्षकों का मौन मार्च, पुनर्मतदान की मांग

मतगणना में धांधली के आरोपों पर शिक्षकों का मौन मार्च, पुनर्मतदान की मांग

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट) ने राष्ट्रपति और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को भेजा ज्ञापन

देवरिया। गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना में कथित अनियमितताओं के विरोध में गुरुवार को शिक्षकों और लोकतंत्र समर्थकों ने शहर में मौन जुलूस निकाला। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट) के प्रदेशव्यापी आह्वान पर निकाले गए इस मार्च के बाद, प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को संबोधित ज्ञापन सौंपा। संगठन ने पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने और आरोप सही पाए जाने पर पुनर्मतदान कराने की मांग की है।

ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के प्रदेश प्रवक्ता श्रवण कुमार कुशवाहा ने 27 अक्टूबर को गोरखपुर विश्वविद्यालय में हुई मतगणना की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मतगणना के दौरान करीब 2,800 मतों को अकारण अवैध घोषित कर दिया गया। इसके अतिरिक्त, मतपेटियों में मतपत्र लेखा से अधिक मत पाए गए, कई पेटियों की पेपर सील टूटी हुई थी और चौथे चक्र की गिनती में 1,612 मतों का अप्रत्याशित अंतर सामने आया। उन्होंने दावा किया कि संगठन के प्रत्याशी राजीव यादव चुनाव जीत चुके थे, लेकिन कथित धांधली के जरिए उन्हें पराजित घोषित कर दिया गया।

संगठन ने मांग की है कि मतगणना केंद्र और स्ट्रांग रूम की सीसीटीवी फुटेज व वीडियो रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखा जाए। साथ ही, राज्य सरकार के अधीन न आने वाली स्वतंत्र एजेंसी से पूरे प्रकरण की जांच कराई जाए, संदिग्ध मतपत्रों का फोरेंसिक व हस्तलेख विशेषज्ञों से परीक्षण हो और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। प्रदेश प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल 5 नवंबर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर शिक्षकों, कर्मचारियों, अधिवक्ताओं और बुद्धिजीवियों के बीच जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

इस अवसर पर जिलाध्यक्ष सुरेश सिंह ने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति या संगठन के राजनीतिक हितों की लड़ाई नहीं है, बल्कि लोकतंत्र, संविधान और आम नागरिक के मताधिकार के सम्मान से जुड़ा विषय है। वहीं, वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष विद्यासागर सिंह ने कहा कि चुनाव में जीत-हार से अधिक महत्वपूर्ण मतदाता के जनादेश का सम्मान है और निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था बनाए रखने के लिए समाज के जागरूक लोगों को अपनी भूमिका निभानी होगी।

मौन मार्च में सत्येंद्र कुमार सिंह, विपिन श्रीवास्तव, रविन्द्र कुमार, अर्जुन दीक्षित, जीआर प्रजापति, सरफराज अहमद, अखिलेश विश्वकर्मा, उमेश यादव, अनिताभ कुमार, डॉ. योगेंद्र यादव, हेसामुद्दीन, विपिन शुक्ला, अजीत कुमार पटेल, भानु प्रताप सिंह, वीरेंद्र शर्मा, जितेंद्र यादव, आनंद कुमार, रामकारन यादव, अखिलेश कुशवाहा, जफर इकबाल, विनोद कुमार राय, अशोक कुमार और वीरेंद्र कुमार सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं समर्थक मौजूद रहे।