महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर 'मनरेगा बचाओ यात्रा' की हुई शुरुआत
बलिया। महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर 'मनरेगा बचाओ यात्रा' की शुरुआत शनिवार को रसड़ा में बापू की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई। इस यात्रा में शामिल गांधीवादी युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और मजदूर साथियों ने बापू के विचारों को याद करते हुए ग्रामीण रोजगार और मजदूर अधिकारों की रक्षा का संकल्प लिया। मनरेगा बचाओ यात्रा रसड़ा से शुरू करते हुए बापू को श्रद्धांजलि देकर नगरा तक मजदूरों से संवाद करते हुए। रसड़ा में बापू को श्रद्धांजलि अर्पित कर मनरेगा बचाओं यात्रा की शुरुआत की। इस यात्रा में शामिल गांधीवादी युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और मजदूर साथियों ने बापू के विचारों को याद करते हुए ग्रामीण रोजगार और मजदूर अधिकारों की रक्षा का संकल्प लिया।
इस अवसर पर गांधीवादी युवा विवेक ने आरोप लगाया कि सत्ता में बैठी ताकतें महात्मा गांधी के नाम और विचारों से जुड़े कार्यक्रमों, विशेषकर मनरेगा जैसी योजनाओं को कमजोर कर रही हैं। उन्होंने कहा कि मनरेगा से गांधी का नाम हटाना और इसके प्रावधानों में कटौती करना उनके ग्राम स्वराज और श्रम सम्मान के सिद्धांतों के विपरीत है। यात्रा में शामिल रजत सिंह ने बताया कि हाल के वर्षों में मनरेगा के कई प्रावधानों में बदलाव किए गए हैं। इससे मजदूरों के काम के अधिकार और न्यूनतम मजदूरी की गारंटी कमजोर हुई है, जिससे करोड़ों दलित, पिछड़े, आदिवासी, महिलाएं और भूमिहीन ग्रामीण मजदूर प्रभावित हो रहे हैं।यह यात्रा अपने 14 वें दिन रसड़ा से शुरू होकर विभिन्न गांवों से गुजरी और ग्रामीणों, मजदूरों तथा महिलाओं से संवाद करते हुए नगरा में रात्रि विश्राम के लिए पहुंची। यह यात्रा गोरखपुर से शुरू हुई थी और देवरिया, बलिया, मऊ, गाजीपुर होते हुए बनारस तक जाएगी, जहां 17 फरवरी को इसका समापन प्रस्तावित है।
यात्रा की मुख्य मांगें हैं काम का संवैधानिक अधिकार बहाल किया जाए, मजदूर विरोधी कानूनों को वापस लिया जाए और न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन सुनिश्चित की जाए। इस यात्रा में विभिन्न जिलों के सामाजिक कार्यकर्ता और गांधीवादी युवा बड़ी संख्या में शामिल हैं।
