ड्रोन संचालन से जुड़े कानूनी प्रावधान पर हुई चर्चा

ड्रोन संचालन से जुड़े कानूनी प्रावधान पर हुई चर्चा

ड्रोन संचालन से जुड़े कानूनी प्रावधान पर हुई चर्चा

कुलपति ने छात्रों के कौशल की सराहना की

पीयू में ड्रोन बूटकैंप का तीसरा दिन संपन्नॉ

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग संस्थान के इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग द्वारा सी-डैक, नोएडा के सहयोग से आयोजित पांच दिवसीय “मानव रहित विमान प्रणाली एवं उसका उपयोग” बूटकैंप का तीसरा दिन ज्ञानवर्धक एवं प्रायोगिक गतिविधियों से भरपूर रहा। बूटकैंप में विद्यार्थियों ने ड्रोन नियमन, सेंसर तकनीक, लिडार तकनीक तथा ड्रोन असेंबली का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। 

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह ने कार्यशाला स्थल का निरीक्षण किया और विद्यार्थियों द्वारा प्राप्त किए जा रहे तकनीकी कौशल की सराहना की। उन्होंने छात्र-छात्राओं को नवाचार, प्रयोग और आधुनिक प्रौद्योगिकी सीखने के लिए प्रोत्साहित किया। बूटकैंप में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी और उत्साह देखकर उन्होंने आयोजक टीम को भी बधाई दी। 

कार्यक्रम के प्रथम सत्र में सी-डैक, नोएडा की वैज्ञानिक-एफ डॉ. कल्पना जौहरी ने “ड्रोन रूल्स एंड रेगुलेशंस” पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने भारत में ड्रोन संचालन से जुड़े कानूनी प्रावधान, उड़ान सुरक्षा, पंजीकरण एवं जिम्मेदार उपयोग को सरल भाषा में समझाया। उनके लगभग दो दशकों के शोध एवं तकनीकी अनुभव ने सत्र को विशेष उपयोगी बनाया। 

दूसरे सत्र में सी-डैक की प्रोजेक्ट इंजीनियर किरण वालिया ने “इंट्रोडक्शन टू सेंसर्स” तथा लिडार तकनीक पर जानकारी दी। उन्होंने रिमोट सेंसिंग, डेटा मैपिंग और ड्रोन आधारित वास्तविक अनुप्रयोगों को उदाहरणों के साथ समझाया। विद्यार्थियों को उद्योग की समकालीन आवश्यकताओं और ड्रोन तकनीक के व्यावहारिक उपयोगों से रूबरू कराया गया। 

प्रायोगिक सत्र में विद्यार्थियों ने स्वयं ड्रोन के विभिन्न घटकों को जोड़ना अर्थात असेंबल करना सीखा। इस अभ्यास ने उनके तकनीकी आत्मविश्वास, समस्या-समाधान कौशल और विज्ञान के प्रति रुचि को और मजबूत किया। बूटकैंप का उद्देश्य विद्यार्थियों को मानव रहित विमान प्रणाली, सेंसर तकनीक और उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों में दक्ष बनाना है। 

इस आयोजन को सफल बनाने में इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग के शिक्षकों एवं सहयोगियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इनमें डॉ. संतोष कुमार त्रिपाठी, डॉ. प्रवीण कुमार सिंह, शैलेश प्रजापति, सुधीर सिंह, डॉ. रीतेश बरनवाल, डॉ. पारुल त्रिवेदी, डॉ. ज्योति पी. सिंह, पूनम सोनकर, तुषार, विशाल, जया शुक्ला, नवीन चौरसिया तथा अनुराग प्रमुख रूप से शामिल रहे।