सतुआन पर्वआज धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
देवरिया।सतुआन पर्व 14 अप्रैल दिन सोमवार बैसाख माह के कृष्णा पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनेगी। माना जाता है कि इस दिन सूर्य भगवान अपनी उत्तरायण की आधी परिक्रमा को पूरी कर लेते हैं। यह त्योहार गर्मी के मौसम का स्वागत करता है। इस पर्व में प्रसाद के रूप में सत्तू, कच्चे आम, मूली और गुड़ का सेवन किया जाता है। इसलिए इसका नाम सतुआन पड़ा। हम सभी जानते हैं कि गर्मी के मौसम में सत्तू कितना लाभदायक होता है।13 अप्रैल 2025 दिन रविवार को सुबह 03:30 बजे भगवान सूर्य मीन राशि की छोड़कर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। इसी दिन से एक माह से चल रहे खरमास की समाप्ति हो जायेगी और शादी विवाह सहित सभी तरह के शुभ कार्य शुरू हो जायेगा।
सतुआन, जिसे सतुआनी भी कहा जाता है, एक हिंदू त्योहार है, जो भारत के उत्तरी और पूर्वी क्षेत्रों में मनाया जाता है, विशेष रूप से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में। यह त्योहार बैसाख महीने के कृष्ण पक्ष में मनाया जाता है। सतुआन का त्योहार नई फसल के आगमन का प्रतीक है। यह त्योहार भगवान सूर्य को समर्पित है, जिन्हें जीवन और ऊर्जा का स्रोत माना जाता है। इस दिन, लोग भगवान सूर्य को धन्यवाद देते हैं और उनसे अच्छी फसल और समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं। : सत्तू में प्रोटीन, फाइबर और अन्य पोषक तत्व होते हैं। यह शरीर को ऊर्जा देता है और भूख को नियंत्रित करने में मदद करता है।
मूली एक पौष्टिक और औषधीय गुणों से भरपूर सब्जी है। इसमें विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो इसे स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद बनाते हैं।
पाचन क्रिया में सहायक। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है। कैंसर से बचाव। मधुमेह में लाभकारी। वजन घटाने में सहायक। लिवर के लिए फायदेमंद और गुर्दे के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है । एक पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने राजा बलि को हराने के बाद सत्तू का भोजन किया था। इसलिए, इस दिन सत्तू का सेवन करना शुभ माना जाता है।
एक अन्य कथा के अनुसार, भगवान सूर्य ने इस दिन अपनी उत्तरायण की आधी परिक्रमा पूरी की थी। इसलिए, इस दिन सूर्य देव की पूजा करना अति महत्वपूर्ण है। साथ ही सत्तू दान करने की परम्परा रही है।
