दुनियां राम को भजती है और राम भरत को भजते है

दुनियां राम को भजती है और राम भरत को भजते है

गोरखपुर। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा व प्रताप सभागार फाउंडेशन ट्रस्ट के तत्वावधान में क्षत्रिय भवन रामगढ़ ताल थाना के सामने चल रही श्री राम कथा की अमृत वर्षा का रसपान भारत कि अदभुत दृष्टिक ग्रन्थ श्री राम चरित मानस दृष्टिक ग्रन्थ कि रचना करने वाले रघुवंश हिंदू जी के द्वारा कराया जा रहा है। श्री राम कथा के छठे दिवस में रघुवंश हिंदू जी ने कहा कि जब श्री राम जी वन को चले गए तो भरत को ननिहाल से बुलाया गया।

 

भारत जी ने कैकई माता से राम के वन गमन की कहानी सुनी तो वह व्यथित हो करके गिर पड़े। उसके पश्चात कौशल्या जी के पास दौड़ते हुए पहुंचे धीर बुद्धि कौशल्या जी अपने भरत को कई तरह से समझाया। गुरु वशिष्ट जी ने समझाते हुए कहा हानि जीवन मरण यश अपयश 6 चीज विधि के हाथ में होती है इस पर किसी का बस नहीं चलता। भरत ने कहा कि अगर दोनों वरदान देना ही था तो पहले मुझे राजा बनने का वरदान था । पहले वरदान पहले पूरा किया गया होता । मुझे राजा बना दिया गया होता तो मैं राजाज्ञा पारित कर देता की राम अयोध्या के राजा होंगे। इस प्रकार से वरदान भी हो जाता और हमारे भैया हम से दूर भी नहीं होते। भरत जी राम को मनाने के लिए चल देते हैं।

 जब निषादराज को देखते ही वशिष्ठ कहते हैं कि यह तुम्हारे भाई राम के मित्र निषादराज है । भरत रथ से कूद पड़ते हैं कि हमारे भाई के मित्र जमीन पर हो तो हमें रथ पर चढ़ने का अधिकार नहीं है। इससे इस समाज को ज्ञान मिलता है कि अपने से बड़ों का मित्र अपने से बड़ा ही होता है चाहे वह कोई भी हो। भरत जी को जब पता चला कि यहां से भैया पैदल गए हैं तो उन्होंने कहा मुझे तो सर के बल जाना चाहिए इसलिए मैं भी पैदल ही यहां से जाऊंगा।

 

भाई का प्रेम अद्भुत है। उधर इंद्र देवता ने जब बृहस्पति जी से कहा कि कुछ करिए सरस्वती जी से पुन :निवेदन करिए कहीं ऐसा ना हो कि भरत के प्रेम में राम घर को लौट जाए। बृहस्पति जी ने स्पष्ट रूप से कहा कि ऐसी गलती मत करना केवल भक्ति की पराकाष्ठा को देखो क्योंकि दुनिया राम को भजती है और राम भरत को भजते हैं। भरत जी निषाद राज के साथ राम से मिलते हैं और राम जी ने विशेष प्रकार से भरत को समझाया और पादुका अवतार ग्रहण करके उन्हें पादुका प्रदान किया।

श्री राम कथा की आरती मे मुख्य रूप से प्रहलाद शाही जी ने किया साथ में रामदेव सिंह, राधेश्याम चंद, नरसिंह सिंह, इंद्रजीत सिंह चंदेल अभय सिंह चंदेल, दिलीप शाही विजय बहादुर सिंह, गोविंद तिवारी, सुभाष राव के साथ ही काफी सख्या मे भगवान राम के भक्त उपस्थित रहे ।