जागृति के बरगद सभागार में दो दिवसीय कार्यशाला का समापन

जागृति के बरगद सभागार में दो दिवसीय कार्यशाला का समापन

- कार्यशाला में शामिल हुए 30 से अधिक एफपीओ, फूड प्रोसेसिंग कंपनियों के निदेशक व कृषि उद्यमी

देवरिया। जागृति उद्यम केंद्र-पूर्वांचल के बरपार स्थित बरगद सभागार में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का समापन बुधवार को हुआ। ‘टीब एग्रीफूड फ्रेमवर्क फॉर बिजनेस डिसीजन मेकिंग: मापन और मूल्यांकन की भूमिका’ विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए 30 से अधिक एफपीओ, फूड प्रोसेसिंग कंपनियों के निदेशक, सीईओ और कृषि उद्यमियों ने भाग लिया। 

सेंटर फॉर रिस्पॉन्सिबल बिजनेस (सीआरबी) के असिस्टेंट डायरेक्टर संजीव कुमार ने कहा कि आज कृषि एवं खाद्य व्यवसाय केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रह सकते। व्यवसायों को अपने सामाजिक, पर्यावरणीय और आर्थिक प्रभावों को समझते हुए दीर्घकालिक एवं जिम्मेदार निर्णय लेने होंगे। उन्होंने प्रतिभागियों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और टिकाऊ व्यवसाय मॉडल की आवश्यकता पर विस्तार से जानकारी दी।

यूएनईपी टीम से शालिनी ने कहा कि कृषि व्यवसायों के लिए अब केवल लाभ कमाना ही पर्याप्त नहीं है। यह भी जरूरी है कि उनका कार्य समुदाय, पर्यावरण और स्थानीय आजीविका पर सकारात्मक प्रभाव डाले। उन्होंने प्रतिभागियों को व्यवसाय में ‘इम्पैक्ट मेजरमेंट’ की भूमिका समझाई।

यूएनईपी की रिया ने कहा कि आने वाले समय में वही व्यवसाय अधिक मजबूत होंगे, जो अपने प्रभावों को मापने और पारदर्शिता के साथ प्रस्तुत करने में सक्षम होंगे। जागृति उद्यम केंद्र-पूर्वांचल के इन्क्यूबेशन डायरेक्टर विश्वास पांडेय ने कार्यशाला के उद्देश्य और जागृति की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। जागृति के मनोज वर्मा ने कहा कि टीब एग्रीफूड फ्रेमवर्क कृषि एवं खाद्य व्यवसायों को अपने कार्यों और प्रभावों को बेहतर तरीके से समझने में मदद करता है। इसके माध्यम से व्यवसायों को वित्तीय समावेशन, ब्रांडिंग, सीएसआर सहयोग और सरकारी योजनाओं से जुड़ने के नए अवसर मिल सकते हैं। आने वाले समय में सीआरबी और जागृति की टीम प्रतिभागियों को हैंडहोल्डिंग सहयोग भी प्रदान करेगी। इस दौरान सीआरबी टीम से नित्या, दवनीत, तेजस्विनी तथा जागृति टीम से धीरेंद्र यादव, स्नेहा, श्वेता, रवि आदि मौजूद रहे।