सोना का खोना महज धन की हानि नहीं, बल्कि बड़े संकटों का संकेत, जानें क्या कहते हैं ज्योतिष शास्त्र
सोना का खोना महज धन की हानि नहीं, बल्कि बड़े संकटों का संकेत, जानें क्या कहते हैं ज्योतिष शास्त्र
Aacharyatv (डेस्क) | सनातन धर्म और ज्योतिष शास्त्र में स्वर्ण यानी सोने को अत्यंत पवित्र और देव धातु माना गया है। बहुमूल्य होने के साथ-साथ इसका सीधा संबंध हमारे भाग्य और ग्रहों की चाल से भी है। अक्सर लोग सोना खो जाने को केवल आर्थिक नुकसान मानकर टाल देते हैं, लेकिन ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, सोने का गुम होना जीवन में आने वाले गंभीर संकटों का पूर्वाभास हो सकता है।
वहीं गुरु ग्रह के कमजोर होने का संकेत भी बताया जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, स्वर्ण का कारक बृहस्पति (गुरु) है। सोने का खोना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आपकी कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति कमजोर हो रही है। बृहस्पति के प्रतिकूल होने से व्यक्ति के वैवाहिक जीवन में कलह, शिक्षा में बाधा और स्वास्थ्य, विशेषकर पेट संबंधी विकारों का सामना करना पड़ सकता है।
ज्योतिषीय विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर के अलग-अलग अंगों के आभूषण खोने के अलग-अलग प्रभाव होते हैं। यदि कान की बाली या झुमकी गुम हो जाए, तो यह भविष्य में किसी 'अशुभ समाचार' के मिलने का अंदेशा है। नाक के आभूषण का खोना समाज में 'अपयश' या मान-प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचने का संकेत माना जाता है। सोने की अंगूठी का खोना सीधे तौर पर शारीरिक व्याधियों और 'स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों' की चेतावनी है। हाथों के आभूषणों का गुम होना 'मान-सम्मान' में कमी आने को दर्शाता है। यदि गले की चेन या हार खोता है, तो यह जातक के 'वैभव और ऐश्वर्य' में गिरावट का सूचक है। गिरा हुआ सोना मिलना की भी एक
आम धारणा के विपरीत है। रास्ते में गिरा हुआ सोना मिलना भी लाभ के बजाय 'धन हानि' का संकेत माना जाता है। वहीं, यदि आप सपने में अपने घर से गहने चोरी होते देखते तो यह कार्यक्षेत्र या व्यापार में आपके प्रतिद्वंद्वियों द्वारा रची जा रही किसी 'साजिश' की ओर इशारा करता है।
इस सम्बन्ध में शास्त्रों का मत है कि यदि ऐसी कोई घटना घटती है, तो जातक को सचेत हो जाना चाहिए। गुरु दोष के प्रभाव को कम करने के लिए धार्मिक अनुष्ठान और दान-पुण्य की सलाह दी जाती है ताकि आने वाले संकटों के प्रभाव को कम किया जा सके।
