नागरी प्रचारिणी सभा में सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला की जयंती मनाई गई
देवरिया। जनपद के नागरी प्रचारिणी सभा के तुलसी सभागार में महाप्राण सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला जयंती पूर्ण गरिमा और ओजस्वीता के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो सदानंद प्रसाद गुप्त, पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष, उ0 प्र0 हिन्दी संस्थान, लखनऊ, विशिष्ट अतिथि डॉ असीम सत्यदेव, सभाध्यक्ष आचार्य परमेश्वर जोशी, मंत्री डॉ अनिल कुमार त्रिपाठी एवं सभा के अन्य सदस्य गण ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह की औपचारिक शुरुआत की। तत्पश्चात नित्यानंद आनंद ने निराला रचित सरस्वती वंदना "वीणा वादिनी वर दे" प्रस्तुत की। उसके बाद गीतकार दयाशंकर कुशवाहा ने उपस्थित अतिथियों का स्वागत "कितना शुभ हो गया है दिन आज" का गीत के माध्यम से किया।
इसी क्रम में अध्यक्ष आचार्य परमेश्वर जोशी ने अतिथियों के स्वागत क्रम में कहा आज हमारे अतिथि गण ने इस सभा को उत्सव का रुप दे दिया है। आज मैं आप लोगों को अपने बीच पाकर धन्य अनुभव कर रही है।समारोह के विशिष्ट अतिथि डॉ असीम सत्यदेव ने निराला के सम्बन्ध में अपने विचार रखते हुए कहा निराला के साहित्य में श्रमिक और स्त्री की पीड़ा का वर्णन साथ-साथ दिखाई देता है। उन्होंने अपने समय की सामाजिक विसंगतियों को महसूस किया और अपने साहित्य के माध्यम से समाधान सोचने का प्रयास किया। निराला के सरोज की पीड़ा आम स्त्री की पीड़ा है। वे देश के अन्य लोगों की तरह अभाव ग्रस्त रहना पसन्द किए किन्तु धन अर्जित करने का कोई प्रयास नहीं किया।
समारोह के मुख्य अतिथि प्रो सदानंद गुप्त, पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष, उ0 प्र0 हिन्दी संस्थान, लखनऊ ने अपने वक्तव्य में कहा निराला राग विराग के कवि हैं, शान्त और ओज के कवि हैं। निराला सौन्दर्य के कवि हैं, विरोध के कवि हैं। वास्तव में निराला भारतीय संस्कृति के कवि हैं। वे भारतीय संस्कृति के खोये हुए मूल्यों को उद्घाटित करने का काम करते हैं। आगे प्रो गुप्त जी ने कहा निराला किसी में भेद नहीं करते चाहे वह अपना हो या पराया। वे कभी निराश नहीं होते, उन्होंने विवेकानंद कै अद्वैत वाद को व्यावहारिक रुप देने का कार्य किया है। वास्तव में वे मानवता वाद के कवि हैं। इसीलिए वे दलित को भी अपने साहित्य में कथा नायक बनाते हैं। उनका अध्ययन अनेक दृष्टियों से किया जाता रहा है और आगे भी किया जाता रहेगा।
मुख्य अतिथि के उद्बोधन के बाद सभा की काव्य गोष्ठी में निरन्तर कविता पाठ करने वाले कवि बंधु रमेश सिंह दीपक, विनोद कुमार पाण्डेय, योगेन्द्र पाण्डेय, दयाशंकर कुशवाहा, इन्द्र कुमार दीक्षित, सूर्य नारायण गुप्त सूर्य सौदागर सिंह, पार्वती देवी गौरा, क्षमा श्रीवास्तव, लालता प्रसाद चौधरी, नित्यानंद आनंद, अंजलि अरोड़ा, विनय पाठक, अचल, पुष्कर त्रिपाठी, प्रार्थना राय, विकास तिवारी विक्की, शिखा गोड़, रविनन्दन सैनी, प्रेम नारायण तिवारी, डॉ दिवाकर प्रसाद तिवारी, संतोष कुमार सूर्य, योगेन्द्र तिवारी योगी, बृजेन्द्र मिश्र, सरोज कुमार पाण्डेय, छेदी प्रसाद गुप्त विवश, उद्भव मिश्र, गोपाल त्रिपाठी, रामेश्वर तिवारी राजन, अन्टू तिवारी, सीमा नयन, डा. शकुन्तला दीक्षित, वरुण पाण्डेय, डा. रमाकांत कुशवाहा आदि को उत्तरीय, डायरी और कलम देकर मंत्री डॉ अनिल कुमार त्रिपाठी, अध्यक्ष आचार्य परमेश्वर जोशी एवं संयोजक डॉ सौरभ श्रीवास्तव ने सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ मधुसूदन मणि त्रिपाठी ने किया। कार्यक्रम के संयोजक डा. सौरभ श्रीवास्तव रहे। अंत में सभा के मंत्री डॉ अनिल कुमार त्रिपाठी ने श्रोताओं, कवि गण एवं अतिथि गण के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा आपके सहयोग एवं उपस्थिति से हम उत्साहित व गौरवान्वित होते हैं। हम आशा करते हैं कि आगे भी आप सब का सहयोग ऐसे ही मिलता रहेगा।
इस मौके पर पर श्वेतांक करण त्रिपाठी, सतीश पति त्रिपाठी, दिनेश कुमार त्रिपाठी, रवीन्द्र नाथ तिवारी, श्रीमती दुर्गा पाण्डेय, डॉ शकुन्तला दीक्षित, विजय प्रसाद, हृदय नारायण जायसवाल, अनिल कुमार त्रिपाठी, शिवाजी राय, डॉ चतुरानंद ओझा, डॉ राधेश्याम शुक्ल, अशोक दीक्षित, ऋषिकेश मिश्र, रजनीश गोरे आदि लोग मौजूद रहे।
