अधिक से अधिक पशुओं को टीकाकरण कराए पशुपालक, एफएमडी फेज-6 के माइक्रोप्लान की समीक्षा बैठक सम्पन्न
देवरिया। मुख्य विकास अधिकारी प्रत्यूष पाण्डेय की अध्यक्षता में एफएमडी फेज-6 के माइक्रोप्लान की समीक्षा बैठक मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी कार्यालय में आयोजित की गई। बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत एफएमडी का टीकाकरण अभियान दिनांक 23 जुलाई 2025 से 5 सितम्बर 2025 तक कुल 45 दिनों तक संचालित किया जाएगा।
मुख्य विकास अधिकारी ने इस महत्त्वपूर्ण अभियान को सफल बनाने हेतु पशु चिकित्सा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एफएमडी जैसी संक्रामक बीमारी की गम्भीरता को देखते हुए विकास खण्डवार व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए ताकि अधिक से अधिक पशुपालक अपने पशुओं का टीकाकरण करवा सकें। प्रचार-प्रसार हेतु समाचार-पत्र, पोस्टर, लीफलेट, बाल पेंटिंग प्रतियोगिता, बैनर, लाउडस्पीकर, कृषक गोष्ठियाँ एवं ग्राम पंचायत की बैठकों का आयोजन किया जाए। टीकाकरण से पूर्व, सचल पशु चिकित्सा वाहनों में लगे स्पीकरों के माध्यम से ग्रामों में पशुपालकों को सूचित किया जाए, जिससे पशुओं की उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके और उनके आवागमन को रोका जा सके।
जनपद स्तर पर टीकाकरण हेतु प्राप्त वैक्सीन को 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान पर सुरक्षित किया गया है। ब्लॉक स्तर पर वैक्सीन का वितरण आवश्यकतानुसार समय से किया जाएगा, जिसमें कोल्ड चेन की सतत निगरानी की जाएगी। टीकाकरण टीमों को निर्देशित किया गया है कि वैक्सीन का परिवहन केवल आइस जेल पैड अथवा वर्षा लगाकर युक्त वैक्सीन कैरियर में ही किया जाए, और कोल्ड चेन किसी भी स्थिति में बाधित न हो। इसकी सतत निगरानी संबंधित पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा सुनिश्चित की जाएगी।
टीकाकरण के दौरान सभी पशुओं की टैगिंग एवं उसका विवरण भारत पशुधन ऐप पर टीकाकरण के दिन ही अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाए। सीरो मॉनिटरिंग योजना के अंतर्गत चयनित ग्रामों से टीकाकरण से पूर्व यानी शून्य दिवस (जीरो डे) पर प्री-वैक्सीनेशन रक्त सैम्पल एकत्र कर अधिकतम एक सप्ताह के भीतर राजकीय पशु चिकित्सालय, देवरिया सदर को उपलब्ध कराया जाए, जिससे संकलित सीरम को निर्धारित प्रारूप में तैयार कर परीक्षण हेतु वेटनरी कॉलेज, मथुरा की क्षेत्रीय अनुसंधान प्रयोगशाला को भेजा जा सके। इसी प्रकार, टीकाकरण के 30 दिन पश्चात उन्हीं पशुओं से पोस्ट वैक्सीनेशन सैम्पल भी एकत्र कर निर्धारित समयसीमा में परीक्षण हेतु प्रेषित किया जाए। प्री वैक्सीनेशन सैम्पल एकत्र करने से पूर्व चिन्हित पशुओं को परजीवीनाशक दवा अवश्य पिलाई जाए।
प्री और पोस्ट सैम्पल का शत-प्रतिशत स्थलीय सत्यापन उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) / जनपदीय नोडल अधिकारी द्वारा अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए। यदि सैम्पल रिपोर्ट में किसी प्रकार का विरोधाभास पाया जाता है तो उसकी जवाबदेही संबंधित अधिकारी की होगी। टीकाकरण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. धोबी रौनक राजेश, पशु चिकित्सा अधिकारी, नलुअनी को नामित किया गया है, जिनसे मोबाइल नंबर 9369030281 पर संपर्क किया जा सकता है।
प्रत्येक पशु को लगाए गए टीके का विवरण पशु टीकाकरण पंजिका में तिथि सहित दर्ज किया जाए एवं उसे भारत पशुधन ऐप पर भी अंकित किया जाना अनिवार्य है। टीकाकरण व टैगिंग के आधार पर कार्यकर्ताओं को मानदेय देय होगा, जिसकी दर ₹5.00 प्रति पशु (टीकाकरण हेतु) तथा ₹3.50 प्रति पशु (टैगिंग हेतु) निर्धारित की गई है। यह भुगतान भारत पशुधन ऐप पर अपलोडिंग के बाद ही निदेशालय द्वारा किया जाएगा।
टीकाकरण के बाद उन पशुओं को, जिन्हें पहली बार टीका लगाया गया है, एक माह बाद बूस्टर डोज़ भी दी जाएगी। वैक्सीन की प्राप्ति एवं वितरण का संपूर्ण अभिलेख नियमानुसार तैयार किया जाए। किए गए टीकाकरण का ग्रामसभावार अभिलेख तैयार करते हुए पंजिकाएं संबंधित संस्थाओं में सुरक्षित रखी जाएं। विकास खंडों के अंतर्गत आने वाले राजकीय पशुधन प्रक्षेत्रों एवं गोशालाओं में भी प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए।
जनपद के सीमावर्ती विकास खंडों व ग्रामों में भी टीकाकरण हेतु सभी आवश्यक लॉजिस्टिक सामग्री जैसे सिरिंज, नीडिल व अन्य उपकरण समय से उपलब्ध कराए जाएं, और निर्धारित समयसीमा के भीतर सौ प्रतिशत टीकाकरण लक्ष्य को प्राप्त किया जाए।
