डॉ०संतोष कुमार ने बढ़ाया मान, बनाया मानव अनुसरण रोबोट
देवरिया । आप एक इशारा करते हैं और आपका सामान अपने आप आपके पीछे-पीछे चल पड़ता है। यह कोई साइंस-फिक्शन फिल्म का दृश्य नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) कुरुक्षेत्र के इंजीनियरों की नई खोज है। डॉ. संतोष कुमार के मार्गदर्शन में छात्रों ने एक ऐसा मानव-अनुसरण रोबोट बनाया है, जो एक इशारे पर सामान ढो सकता है। इस अनोखी तकनीक को हाल ही में पेटेंट भी मिला है, जो संस्थान के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
यह रोबोट कम लागत और गजब की दक्षता का शानदार मेल है। इसमें इंटेलिजेंट ट्रैकिंग सिस्टम की ताकत है, जो मानव गतिविधियों को पढ़कर उनके पीछे चलता है और सामान को सटीकता से पहुंचाता है। गोदामों में भारी-भरकम सामान शिफ्ट करना हो, अस्पतालों में दवाएं और उपकरण ले जाना हो या मॉल में शॉपिंग का बोझ हल्का करना हो।
डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि यह रोबोट खासकर कोविड जैसे महामारी के समय में अस्पतालों और कंटेनमेंट जोन में सहायक हो सकता है। उन्हें भी इसी महामारी से ये रोबोट बनाने की प्रेरणा मिली थी। इसमें लगा कैमरा मानव की छवि को पहचानता है और एक बॉक्स के माध्यम से उसे मार्क करता है। अल्ट्रासोनिक सेंसर यह सुनिश्चित करता है कि रोबोट और इंसान के बीच एक सुरक्षित दूरी बनी रहे।
कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभाग से डॉ. संतोष कुमार के मार्गदर्शन में रोबोट पर छात्र अजय ठकरान, अक्षय अग्रवाल और पुलकित महाजन ने अपने कार्य से आत्मनिर्भर भारत के विजन को मजबूत किया है। उनका कहना है कि यह ऐसी तकनीक बनाई गई है जो किफायती, पर्यावरण अनुकूल और हर किसी के लिए उपयोगी है। रोबोट का डिजाइन हल्का और टिकाऊ है।
डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि यह रोबोट एक विजन-आधारित ट्रैकिंग सिस्टम पर काम करता है। रोबोट एक व्हील-बेस्ड सिस्टम है। इसके कैमरे पहले इंसान को कपड़े, रंग, ऊंचाई से पहचानते हैं और फिर उसी व्यक्ति को एल्गोरिदम (किसी काम को पूरा करने के लिए चरणों का एक समूह) की मदद से फॉलो करना शुरू करता। इसमें लगे सेंसर रास्ते में आने वाली बाधाओं को पहचानते हैं। रोबोट अपने मार्ग को खुद ही समायोजित करता है। इसे खास तरह के हाथ के इशारे से ऑन या ऑफ किया जा सकता है। यानी किसी बटन या रिमोट की जरूरत नहीं। उपयोगकर्ता जैसे ही इशारा करता है, रोबोट एक्टिव हो जाता है और सामान लेकर उसके पीछे-पीछे चल पड़ता है। इसमें विजन बेस्ड ट्रैकिंग, अल्ट्रासोनिक सेंसर और हैंड जेस्चर डिटेक्शन सिस्टम लगाया गया जो इसे एक स्मार्ट और ऑटोमेटिक मूवमेंट की क्षमता प्रदान करती है।
बता दें कि डॉo संतोष कुमार रामपुर कारखाना विकासखंड के रामपुर चंद्रभान अमतही गांव निवासी स्व जगदीश गोंड के पुत्र है। उनकी माँ किशोरी देवी ने बताया की सन्तोष कुमार ने हाई स्कूल की पढ़ाई अशोक इंटर कॉलेज डुमरी, इंटर की पढ़ाई महाराजा अग्रसेन इंटर कॉलेज देवरिया से किया। इसके बाद वे कुरुक्षेत्र के राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान से इंजीनियरिंग में पीएचडी की । उन्होंने आगे बताया की हम सभी इनके इस आविष्कार से बहुत खुश हैं हमे उम्मीद है की आगे भी उनकी देख रेख में उनकी टिम अच्छा करेगी।
